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IPC 498A letter by Avani for Rajya Sabha by Avani

प्रेक्षक ,
;;;;;;;;
प्रति,
श्री राकेश नैथानी,
जोइंट डिरेक्टर, राज्य सभा सचिवालय,
पार्लियामेंट हाउस अन्नेक्से,
नयी दिल्ली – ११०००१

विषय : भारतीय दंड संहिता कलम ४९८ ए के संशोधन के लिए सुझाव
आदरणीय महोदय,

मैं अहमदाबाद में रहने वाली एक वरिष्ठ महिला नागरिक हूँ. मैं स्वयं भारतीय दंड संहिता की कलम ४९८ ए के दुरूपयोग से पीड़ित हूँ और यह इच्छा रखती हूँ की इस कलम का जल्दी से संशोधन किये जाना चाहिए नहीं तो इसके ज़रिये भारत के कई मासूम परिवारों का विनाश सुनिश्चित है.

इस विषय में मेरे सुझाव इस प्रकार हैं :

1.  इस कानून का दुरूपयोग करने वाली महिला को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए. ऐसी परिस्थिति में झूठे आरोप के भोगी परिवार को सरकार द्वारा मुआवज़ा एवं अभियोक्ता लड़की से भी मुआवज़ा दिलवाए जाना चाहिए.

2.  जिन मामलों में ये प्रथम दृष्टि पाया जाता है की अभिभोक्ता लड़की के साथ कोई अत्याचार नहीं हुआ, उनमे पति के परिवार के लोगों को आरोपियों की सूची में से हटाये जाना चाहिए और उनपर कोई केस न चलाया जाए.

3.  यदि पाया जाए की अभियोक्ता लड़की ने ससुराल पक्ष के सभी अथवा काफी सारे सदस्यों पर आरोप लगाये हैं तो उस लड़की के इरादे पर भी शक करना चाहिए. यदि उनमे से एक भी निर्दोष पुरुष या फिर महिला पर उसने झूठे आरोप लगाये हैं तो येही कारण पर्याप्त है अभियोक्ता को सजा देने के लिए. उसे कानून की किसी भी धारा में कोई  भी आर्थिक सहायता नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि किसी भी तरह का आर्थिक फायेदा उसके बुरे आचरण को बढ़ावा देगा और कई लड़कियों को झूठे केस करके माननीय कोर्ट व मासूम लोगों का समय नष्ट करने की प्रेरणा देगा.

4.  एक ही तरह के आरोपों के बल पर विभिन्न केस करने क अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. फिलहाल तो एक ही आरोप पर डोमेस्टिक वायोलेंस एक्ट व ४९८ ए किये जाना शक्य है जिसके कारण झूठे आरोपों में फसे मासूम परिवारों को काफी कष्ट का सामना करना पड़ता है. संक्षेप में कहा जाये तो यदि किसी लड़की ने एक ४९८ ए का केस किया हुआ है तो इस केस के पूरा होने तक उन्ही आरोपों पर डोमेस्टिक वायोलेंस का केस करना संभव नहीं होना चाहिए.

  1. क़ानून की धारा ४९८ ए बनायी गयी थी “महिलाओं” को अत्याचार से बचाने के लिए परन्तु  इसके लाभ केवल बहुओं व पत्नियों को ही उपलब्ध हैं. ऐसी स्थिति में देखा जाए तो माँ एवं बहनों के लिए कोई भी कानून नहीं है जो उन्हें भाभी, बहु आदि के अत्याचार से संरक्षण दे. बल्कि देखा जाए तो ऐसे झूठे केसों में फसी महिलाओं के साथ तो पुलिस के अधिकारी भी दुर्व्यवहार करते हैं और सिफ आरोपियों की सूची में नाम होने के कारण उन्हें ये सब सहना भी पड़ता है. दुख की बात तो यह है की ऐसी स्थिति में फसी महिलाओं को तो National Commission for  Women से भी कोई सहायता उपलब्ध नहीं है. इन तकलीफों को दूर करने के लिए ४९८ ए में ऐसा एक अनुच्छेद डाले जाना चाहिए की :
  • ऐसे केसों में फसी महिलाओं को मुकदमें के दौरान आर्थिक सहायता उपलभ करवाइ जाए
  • ऐसे केसों में फसी महिलाएं यदि बहु अथवा भाभी के द्वारा अपने खिलाफ किये गए अत्याचार का प्रमाण ले आयें तो इसी धारा के प्रावधानों का लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए.

आभारी,

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Categories: Parliament
  1. s.p.seth
    December 23, 2010 at 3:05 pm

    plz let me kno the e mail adres on wch i sud send my same feelings. i m too victim of 498a being fil of comlnnt

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