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पुलिस ने झूठे रेप केस में फंसाया बुजुर्ग को

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अदालत ने पूर्वी जिला पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि उसने 65 
साल के बुजुर्ग व्यक्ति को रेप के झूठे केस में फंसा दिया। अडिशनल सेशन जज अतुल कुमार गर्ग की अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए डीसीपी (ईस्ट) को दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने तीन महीने के भीतर डीसीपी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

पेश मामले के मुताबिक, मयूर विहार इलाके में रहने वाली इंद्रावती (बदला हुआ नाम) की बेटी किसी युवक के साथ घर से चली गई थी। कुछ दिन बाद लड़की वापस लौट आई थी। इस संबंध में इंद्रावती का लड़के के परिवारवालों से कोर्ट में केस चल रहा था। इंद्रावती का आरोप है कि धर्म सिंह चौहान (बदला हुआ नाम) इलाके का प्रधान है। उसने महिला को भरोसा दिलाया कि वह लड़के वालों से उसका समझौता करा देंगे। इस संबंध मंे वह कई बार महिला से मिला। आरोप है कि 13 जून 2008 की रात प्रधान महिला से मिला। उसने इंद्रावती से कहा कि वह लड़के वालों को भी बुला लेगा। इस दौरान प्रधान उसे एक मकान के फर्स्ट फ्लोर पर लेकर गया। वहां पर दो लोग पहले से मौजूद थे। प्रधान ने उन दोनों की मदद से महिला के साथ रेप किया। महिला किसी तरह छूटकर अपने घर पहुंची। घर पहुंचकर उसने अपनी बहन को आपबीती बताई। इस बीच बहन का लड़का भी वहां पहुंच गया। उसी ने पुलिस को फोन किया। कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने महिला के बयान पर 65 वर्षीय प्रधान को गिरफ्तार कर लिया।

अभियोजन पक्ष ने प्रधान पर आरोप साबित करने के लिए 14 गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमंे से कई गवाहों ने अभियोजन पक्ष की स्टोरी को सपोर्ट नहीं किया। अदालत ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि केस के जांच अधिकारी सबइंस्पेक्टर संजय भट्ट ने न तो पीडि़ता की बहन का बयान रेकॉर्ड किया और न ही उसके बेटे का, जिसने पुलिस कॉल की थी। इसके साथ ही अदालत ने पीडि़ता से भी कई सवाल पूछे। पीडि़ता के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं था कि उसकी बहन का बेटा उसे कैसे मिला। उस वक्त वह कहां जा रहा था। इसके साथ ही पुलिस उस जगह का कोई सबूत पेश नहीं कर पाई जहां पर पीडि़ता के साथ रेप हुआ था। अदालत ने यह सवाल भी पूछा कि जिस मकान में महिला के साथ रेप हुआ, वह काफी भीड़भाड़ वाला इलाका है। बावजूद इसके महिला ने कोई शोर नहीं मचाया। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने आरोपी के अंडर गारमेंट जब्त करना भी जरूरी नहीं समझा, जबकि रेप जैसे संगीन केस में ऐसा करना जरूरी होता है। इन सब तथ्यों को मद्देनजर रखते हुए अदालत ने कहा कि पुलिस ने यह झूठा केस बनाया है इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है।

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